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Tuesday, July 9, 2013

"प्रकृति अपने स्वत: स्फूर्त नियमों से चल रही है"- स्वामी विज्ञानाचार्य

 जब प्रकृति अपना संतुलन बनाती है,तो मानव को आपदा का सामना करना पड़ता है। स्वामी विज्ञानाचार्य
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 मथुरा, वृंदावन: गोविंद मठ विज्ञान आश्रम में शुक्रवार को उत्तराखंड आपदा में मारे गये लोगों की आत्मा की शांति के लिये हवन-यज्ञ किया गया। स्वामी विज्ञानाचार्य ने कहा कि प्रकृति अपने स्वत: स्फूर्त नियमों से चल रही है। मानव प्रकृति के साथ अज्ञानतावश छेड़छाड़ करता है, जब प्रकृति अपना संतुलन बनाती है तो मानव को आपदा का सामना करना पड़ता है।
इसमें प्रकृति की गलती नहीं है। सारी भूल मानव समाज की है, जिसने प्रकृति के नियमों की अनदेखी करके या अज्ञानता के कारण प्रकृति का दोहन करने की कोशिश की है। राज्यसभा सदस्य दर्शन सिंह यादव ने पर्यावरण पर बोलते हुये प्लास्टिक के प्रयोग को जहर के समान बताया। प्रदूषण को कैंसर के लिये जिम्मेदार करार दिया।
इस अवसर पर यमुना रक्षक दल के अध्यक्ष जयकृष्ण दास, राकेश यादव, रमेश सिसौदिया, हरेश ठेनुआ, अनंत कुमार, विजय, अजय शर्मा, मुनींद्र यादव, सपा नेता डॉ. अशोक अग्रवाल, सपा जिला सचिव आरबी चौधरी, डॉ.संजय कुमार, रामदत्त मिश्र, प्रेमनारायण आदि मौजूद रहे।
राज्यसभा में उठायेंगे मुद्दा सांसद 

सांसद बाबू दर्शन सिंह यादव

प्रकृति के साथ हो रही देशभर में छेड़छाड़ के मामले को सांसद बाबू दर्शन सिंह यादव राज्यसभा में उठायेंगे। उन्होंने पत्रकारों से वार्ता करते हुये कहा कि यमुना तटों तथा यमुना किनारे बसे लोगों को हटा देना चाहिये। पानी को रोकने के लिये बांध नहीं बनाने चाहिये, क्योंकि पानी को रोका नहीं जा सकता है। अगर रोकने के प्रयास करेंगे तो उसका नतीजा भुगतना होगा। प्रकृति से छेड़छाड़ नहीं की जा सकती है।

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